
संस्कृत व्याकरण में वायु एक महत्वपूर्ण शब्द है, जिसका अर्थ हवा या पवन होता है। यह उकारांत पुल्लिंग शब्द है, इसलिए इसके रूप उकारांत शब्दों के नियमों के अनुसार बदलते हैं। शब्द रूप सीखना जरूरी इसलिए है क्योंकि इससे वाक्य बनाना, अर्थ पहचानना और संस्कृत पाठ को समझना आसान हो जाता है। कई परीक्षाओं में वायु जैसे शब्दों के रूप सीधे पूछे जाते हैं।
यह लेख आपको वायु शब्द रूप को एकदम सरल, step-by-step तरीके से समझाएंगे ताकि विद्यार्थी इसे बिना किसी कठिनाई के याद कर सकें।
वायु शब्द के रूप – Vayu Shabd Roop
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वायुः | वायू | वायवः |
| द्वितीया | वायुम् | वायू | वायून् |
| तृतीया | वायुना | वायुभ्याम् | वायुभिः |
| चतुर्थी | वायवे | वायुभ्याम् | वायुभ्यः |
| पंचमी | वायोः | वायुभ्याम् | वायुभ्यः |
| षष्ठी | वायोः | वाय्वोः | वायूनाम् |
| सप्तमी | वायौ | वाय्वोः | वायुषु |
| सम्बोधन | हे वायो! | हे वायू! | हे वायवः! |
वायु शब्द हिंदी अर्थ सहित तालिका
| विभक्ति | संस्कृत रूप | सरल हिंदी अर्थ |
|---|---|---|
| प्रथमा | वायुः | हवा |
| द्वितीया | वायुम् | हवा को |
| तृतीया | वायुना | हवा से |
| चतुर्थी | वायवे | हवा के लिए |
| पंचमी | वायोः | हवा से/हवा के कारण |
| षष्ठी | वायोः | हवा का |
| सप्तमी | वायौ | हवा में/हवा पर |
| सम्बोधन | हे वायो! | ऐ हवा! |
Example Sentences (10 Sentences)
1. एकवचन
- वायुः शाखां चलयति।
हवा शाखा को हिलाती है। - अहं वायुम् अनुभवानि।
मैं हवा को महसूस करता हूँ। - वायुना मेघाः गच्छन्ति।
हवा से बादल आगे बढ़ते हैं।
2. द्विवचन
- वायू नदीतीरयोः वहतः।
दो हवाएँ नदी के किनारों पर बहती हैं। - नौका वायुभ्याम् गच्छति।
नाव दो हवाओं की सहायता से चलती है। - बालकौ वायू अनुभवतः।
दो बच्चे हवा को महसूस करते हैं।
3. बहुवचन
- वायवः दिशः पूरयन्ति।
कई हवाएँ दिशाओं को भर देती हैं। - जनाः वायुभिः शीतलतां प्राप्नुवन्ति।
लोग हवाओं से ठंडक पाते हैं। - वायूनाम् गतिर्निर्नीतुं कठिनम्।
कई हवाओं की गति समझना कठिन है।
वायु जैसे समान अंत वाले शब्द
- गुरु
- शत्रु
- तरु
- मधु
- अरु
ये सभी उकारांत पुल्लिंग शब्द हैं।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?
- “वायु शब्द रूप लिखिए।”
- वाक्य बनाइए: वायुना, वायुम्, वायूनाम्
- रिक्त स्थान में सही रूप भरिए।
विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सुझाव
- प्रतिदिन 1–2 उकारांत शब्दों का अभ्यास करें।
- प्रथमा–द्वितीया–तृतीया के अर्थ पहले समझें, रूप बाद में याद करें।
- तालिकाएँ बनाकर रोज़ दोहराएँ।
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